राजनगर–एक भूली बिसरी कहानी - SCP FOUNDATION Madhubani

 राजनगर में आज खण्डहर के रूप में दिख रही इन इमारतों का निर्माण दरभंगा रियासत के राजा रामेश्वर सिंह ने 19वीं सदी के मध्यकाल के बाद संभवतः 1870 के आस–पास कराया था। राजा ने एक विशाल परिसर में कई राजमहल और मंदिरों का निर्माण कराया। इन इमारतों में नौलखा महल,काली मंदिर,दुर्गा मंदिर,कामाख्या मंदिर,गिरिजा मंदिर,रामेश्वरनाथ मंदिर,हाथी महल,रानी महल,मोती महल इत्यादि पर्यटकों को आकर्षित करने लायक भवन थे। इसी परिसर में दरभंगा राज के कामकाज के लिए सचिवालय भी बनवाया गया था। लेकिन 1934 में आए विनाशकारी भूकम्प ने इन इमारतों को नष्ट कर डाला। इनमें से अधिकांश अब अपना अस्तित्व खोने के कगार पर हैं। इस भूकम्प के बाद बची–खुची अथवा बनवायी गयी इमारतों को 1988 के भूकम्प ने तबाह कर दिया। कहते हैं कि तत्कालीन राजा को तंत्र–मंत्र में विशेष रूचि थी। इसी कारण परिसर के सभी 11 मंदिर दक्षिणामुखी हैं। खण्डहरों की दीवारों पर अवशेष इटालियन और पुर्तगाली शैली की नक्काशी तत्कालीन राजाओं की वास्तुकला में अभिरूचि को प्रदर्शित करती है। इस भव्य राज–परिसर का नक्शा ब्रिटिश आर्किटेक्ट एम. ए. कोरनी ने बनाया था। परिसर में एक–दो तालाब भी बने हुए हैं। वर्तमान में इस परिसर में सशस्त्र सीमा बल की 18वीं वहिनी का मुख्यालय है।

































Author-

Amrendra Singh

SCP FOUNDATION

Madhubani Bihar. 



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